मोहित जागेटिया
शनिवार, 12 सितंबर 2020
तू शाम है
कभी अंधकार में चरागों से जलती तू शाम है ।
मेरी साँसों , मेरी धड़कन में तेरा ही नाम है ।
मेरे सपनों को सजाने के लिए अपना बना ले ,
मेरी मंज़िल मेरे सफ़र का तू ही तो मुकाम है ।।
-- मोहित जागेटिया
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