सोमवार, 13 जुलाई 2026

राम की आस्था चुराई है

जिसने भी भक्तों के दान की रकम खाई है।
मंदिर से जिसने राम की आस्था चुराई है।
वो मेरे, वो सबके राम माफ़ नहीं करेंगे,
अब चुकानी पड़ेगी उसको एक-एक पाई।।
— मोहित जागेटिया

किसी को खास रखता है


ज़माना हमसे मोहब्बत की एक आस रखता है।
टूटे हुए सपनों को सदा वो पास रखता है।
कैसे भूले दर्द के वो पल, कभी जब हम साथ थे।
छोड़ हमारी दोस्ती,किसी और को ख़ास रखता है।।

— मोहित जागेटिया

हम सब सहते रहेंगे

हम प्यार के झरनों में बहते रहेंगे। 
दिल की हल चलों में सब कहते रहेंगे।
कभी निकले हम पहाड़ो से भी कठोर,
गम को छुपा कर हर सब सहते रहेंगे।।
मोहित जागेटिया 

बुधवार, 24 जून 2026

यात्रा नेपाल कथा

हमारी नेपाल यात्रा अत्यंत शांत, सुंदर, सद्भावना और आध्यात्मिकता से भरपूर रही।
यह सब गुरुदेव की विशेष कृपा और आशीर्वाद का ही फल था, कि अपने देश से निकलकर विदेश की पावन भूमि नेपाल के काठमांडू में, भगवान पशुपतिनाथ के सानिध्य में पूज्य महामंडलेश्वर जगदीश पुरी जी महाराज के श्रीमुख से शिव कथा का रसपूर्ण आनंद प्राप्त हुआ।
प्रतिदिन भगवान महादेव पशुपतिनाथ के दर्शन का परम सौभाग्य मिला, जिसने मन को अद्भुत शांति और परमानंद से भर दिया।
इसी यात्रा में डोलेश्वर महादेव मंदिर में केदारनाथ जी के शीश स्वरूप बाबा डोलेश्वरनाथ के दिव्य दर्शन का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। साथ ही प्रथम शक्ति पीठ गुह्येश्वरी मंदिर के दर्शन कर जीवन धन्य हुआ।
इसी पावन धरती पर बूढ़ा नीलकंठ भगवान विष्णु शेष नाग पर शयन दर्शन अद्भुत रहा है। जहां पर हमारे साथियों द्वारा भजनों की धुन का आनंद मिला।
नेपाल की हिमालयी वादियों में स्थित चन्द्रागिरि हिल्स पर बाबा शिव की अद्भुत छटा और प्रकृति की मनमोहक शांति का अनुभव हुआ। वहीं बौद्धनाथ स्तूप के दर्शन से आध्यात्मिक अनुभूति और भी गहरी हो गई।
यह सम्पूर्ण यात्रा गुरुदेव की कृपा, शिव कथा के पावन प्रभाव और भगवान महादेव की असीम अनुकम्पा से ही संभव हो सकी।
इस आध्यात्मिक यात्रा में मेरे आराध्य बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन से जो परमानंद और आत्मिक शांति प्राप्त हुई, वह जीवनभर अविस्मरणीय रहेगी।इसी शिव कथा में अलग अलग संतो का दर्शन भी मिला।
सम्पूर्ण शिव कथा में आने वाले भक्त जनों के लिए रहने, ठहरने सुव्यवस्था वहाँ पर भक्तों के रोज सुबह चाय, नास्ता और दोनु समय रोज अलग अलग खाने की व्यवस्था बहुत की अच्छी थी। ये सब हो पाया गुरुदेव महंत दीपक पुरी जी महाराज के कारण।

कल तो तेरा ये शहर मुझे याद आएगा,
ये पर्वत, ये वादियाँ फिर कहाँ से लाएगा।
तेरे शहर की खुशबू मन को भा गई है,
मन की भक्ति में सदा तूँ दर्शनों में पाएगा।
— मोहित जागेटिया
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यात्रा नेपाल

:-यात्रा संस्मरण 
अभी कुछ ही दिनों पहले मेरी धार्मिक एवं आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत मेरे गाँव से हुई। यह यात्रा गुरुदेव महंत दीपक पुरी जी महाराज के पावन निमंत्रण से प्रारंभ हुई, क्योंकि गुरुदेव ने विदेश की पावन धरती नेपाल के काठमांडू में भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के चरणों में शिवकथा कराने का संकल्प लिया था। उसी कथा-श्रवण का संकल्प लेकर हम मित्रों के साथ यात्रा पर निकले।

यात्रा का पहला पड़ाव अपने गृह राज्य में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर था। मार्ग में होने के कारण हमने वहाँ पहुँचकर सच्चे मन से बालाजी महाराज के दर्शन किए। मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन के बाद हम पावन नगरी अयोध्या पहुँचे। वहाँ सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर जाकर भगवान हनुमानजी के सुंदर स्वरूप के दर्शन किए, जिससे मन को अद्भुत शांति का अनुभव हुआ।

इसके पश्चात हम भगवान प्रभु श्रीराम के भव्य एवं दिव्य मंदिर राम मंदिर अयोध्या पहुँचे। प्रभु श्रीराम के अलौकिक दर्शन से मन भाव-विभोर हो गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो जीवन का समस्त सुख एवं शांति मिल गई हो। अयोध्या की दिव्यता, रामदरबार की भव्यता और वहाँ का आध्यात्मिक वातावरण जीवन को धन्य कर गया। वर्षों की तपस्या के बाद प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि एवं दशरथ महल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

अयोध्या के दर्शन के बाद हम रक्सौल बॉर्डर के रास्ते नेपाल में प्रवेश किए। पूरी रात दुर्गम पहाड़ी मार्गों और ऊँचे पर्वतों के बीच यात्रा करते हुए प्रातःकाल अपने गंतव्य काठमांडू पहुँचे। वहाँ सबसे पहले बाबा पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन किए। दूसरे दिन महामंडलेश्वर श्री जगदीश पुरी महाराज की मधुर एवं रसमयी वाणी में शिवकथा का आनंद प्राप्त हुआ।

काठमांडू में अनेक दिव्य स्थलों के दर्शन का अवसर मिला। चन्द्रागिरि हिल्स पर भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं पूरे काठमांडू का मनोरम दृश्य देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त बूढ़ानीलकंठ मंदिर, बौद्धनाथ स्तूप, स्वयंभूनाथ स्तूप,नेपाल के प्रथम शक्ति पीठ गुह्येश्वरी शक्तिपीठ, कमल पोखरी तथा भगवान केदारनाथ के शीश स्वरूप डोलेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन प्राप्त हुए। कथा-विश्राम के बाद हमारी यात्रा माता जानकी की जन्मभूमि जनकपुर की ओर अग्रसर हुई।

विकट पहाड़ी रास्तों और नदियों को पार करते हुए हम जनकपुर पहुँचे। वहाँ बाणगंगा के दर्शन किए, जहाँ मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने माता सीता के लिए बाण से गंगा प्रकट की थी। इसके बाद भगवान श्रीराम एवं माता जानकी के विवाह स्थल के दर्शन किए। बाबा भूतनाथ, राजा जनक की कुलदेवी एवं भव्य जानकी महल के दर्शन से मन आनंदित हो उठा। वहीं उस ऐतिहासिक स्थान को देखने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ, जहाँ भगवान श्रीराम ने शिवधनुष भंग किया था। इन दिव्य स्थलों के दर्शन के साथ हमारी नेपाल यात्रा पूर्ण हुई। विदेश की धरती पर यह मेरी पहली आध्यात्मिक यात्रा थी, जो जीवनभर अविस्मरणीय रहेगी।

नेपाल से भारत लौटते हुए हमारी यात्रा वाराणसी पहुँची। वहाँ सबसे पहले अस्सी घाट पर गंगा स्नान किया। तत्पश्चात गंगा भ्रमण करते हुए बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए तथा काशी के कोतवाल काल भैरव मंदिर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इसके बाद हम बागेश्वर धाम की ओर रवाना हुए। मार्ग में ऊँची पहाड़ी पर स्थित प्राचीन स्वर्गेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन किए, जहाँ सचमुच स्वर्ग जैसा अनुभव हुआ। वहाँ से आगे बढ़कर बाबा बागेश्वर धाम में दर्शन किए तथा माता अन्नपूर्णा का प्रसाद ग्रहण किया।

वापसी में आदिशक्ति माँ जोगणिया के दर्शन करते हुए अंततः हमारी संपूर्ण यात्रा कोटड़ी श्याम मंदिर के चरणों में पूर्ण हुई। यह संपूर्ण यात्रा गुरुदेव की पावन कृपा एवं मेरे महादेव के आशीर्वाद से ही सफल हो सकी। महादेव की भक्ति का ही यह प्रतिफल था।

इस यात्रा ने जीवन को अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। भक्ति, आस्था और विश्वास पहले से कहीं अधिक दृढ़ हुए। इस यात्रा ने जीवन में वास्तविक आनंद का संचार किया। आध्यात्मिक चेतना और भक्ति-शक्ति का यह अनुभव सदैव मेरे जीवन का अमूल्य आधार रहेगा। इस संपूर्ण यात्रा में हर क्षण आनंद, शांति और दिव्य रस की अनुभूति प्राप्त हुई।
:-मोहित जागेटिया 

वो मुलाक़ात करते हैं

ख़ुशी के गीत लिखते थे, गमों की बात करते हैं ।
ये बादल जो आए थे, कही बरसात करते हैं ।
मुस्करातें जो कभी वो, वही खामोश होते अब,
हम सफ़र की याद बैठे, वो मुलाक़ात करते हैं।।
मोहित जागेटिया 

बुधवार, 17 जून 2026

महाराणा प्रताप जयंती

महाराणा प्रताप जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।।


वो मेवाड़ का अमर बना एक नाम है,

वीर भूमि को पवित्र बना गया धाम है।।


सदा मेवाड़ की बनी अमर पहचान है,

मेवाड़ का प्रताप अटल स्वाभिमान है।।


पराधीनता के विरुद्ध वो तो लड़ा था,

स्वाधीनता की अलख लेकर वो योद्धा खड़ा था।।


चलता रहा जंगल-जंगल, नहीं हार मानी,

हर दुश्मन पर अपनी वो तलवार तानी।।


वो मेवाड़ को कभी गुलाम होने न दिया,

लड़ता रहा मगर मेवाड़ न खोने दिया।।


वो वीर, योद्धा, साहसी — प्रताप नाम था,

जन्म लिया पवित्र भूमि कुम्भलगढ़ धाम था।।


महाराणा मेवाड़ का गौरवगान था,

हर पल महकता हुआ हिन्दू की शान था।।


:- मोहित जागेटिया