मंगलवार, 4 अगस्त 2026

हमने जब से देखा तुमको

हमने जब से देखा तुमको,
वो प्रेम का मौसम आया है।

मेरे दिल की हर धड़कन ने,
आज तुझे अपना बनाया है।

उम्मीदों का ख़्वाब पल रहा,
जब से संग हमने देखा था।

ये प्रीत ऐसी बन गई है, 
मेरे रिश्तों को सजाया है।।

:-मोहित जागेटिया 

गुरू वंदना


गुरुवर वंदना

मंगल-पुष्प वर्षा करो, गुरुदेव जो आएँ।
गुरुदेव के आने से मन मेरा हर्षाए।।

सब बोले मोर-पपीहा, मधुर साज सुनाएँ।
गुरुवर की वंदना में नमन के गीत गाएँ।।

मेरे भाग्य में तुम-से गुरुवर मुझे मिले हैं,
जीवन के पथ पर खुशियों के फूल खिले हैं।

गुरु के आने से खुशियाँ ही खुशियाँ छाईं,
ज्ञान-गंगा बन मेरे आँगन स्वयं ही आई।।

हम शीश झुकाकर गुरुवर को करते प्रणाम,
गुरुवर के पावन चरणों में मिलते चारों धाम।

गुरुवर के आने से मन की ज्योति जल जाए,
मेरे गुरुवर के दर्शन से नयन भर आएँ।।

कुम-कुम रोली,अक्षत से हम भी सत्कार करें।
मेरे गुरुवर की हम सदा जय जयकार करें।।

— मोहित जागेटिया

रविवार, 26 जुलाई 2026

गुरुदेव

   🙏🙏गुरुदेव 🙏🙏

सच्चे मन से हम जिसकी पूजा सदा करें, 
वो दामन हमारी सदा हर ख़ुशी से भरे।
सदा ही मन में भक्ति का हर भाव बढ़ाये, 
सदा ज्योति अनंत मन में ज्ञान की जलाएं।

गुरू जो जीवन के सारे रास्ते बदल दे।
हर पल साया बन कर जो सदा साथ चल दे।।
सबको जीवन में अच्छे बुरे का ज्ञान दे।
क्या है? ईश्वर इसकी कैसे पहचान दे।।

सच्चे गुरू जीवन का रास्ता दिखाते है।
अपने मन के ज्ञान से प्रभु से मिलाते है।
दिव्य रौशनी गुरू की भक्त पर आती है,
जिंदगी में बदकिस्मत भी बदल जाती है।

आओ हम गुरू दर्शन का गुरू धाम करें 
गुरू की पावन चरणों में हम प्रणाम करें।
नमन करें सच्चे मन से सदा वंदन करें। 
जो मिला गुरू मंत्र उसका सदा जतन करें।

:-मोहित जागेटिया 



नई गज़ल लिख रहा हूँ

आज फिर में नई गज़ल लिख रहा हूँ। 
तुम्हे सोच कर अब कल लिख रहा हूँ।।

तमन्ना रही जो उसको सोच रहा,
चल रहा जो वो हर पल लिख रहा हूँ।

मुसीबत के दौर में जो साथ रहें,
उन हाथ को मैं निर्मल लिख रहा हूँ।।

जिनको कभी दिल से समझ न पा रहें,
कठोर मन से फिर सरल लिख रहा हूँ।।

जब से अकेला बैठ कर सोच रहा,
जिंदगी का क्या हल लिख रहा हूँ।।

मोहित जागेटिया 



सावन

सावन आया—सावन आया,
रिमझिम-रिमझिम बरसात का
मौसम आया, सावन आया।
हरि-भरी धरा, खिलता उपवन,
बहती नदिया, कल-कल करते
झरने, महकता मन, सुहाना
मौसम आया—सावन आया।
प्रेम का पपीहा बोले, बोले मोर, कोयल।
पेयसी का दिल भी प्रेमी के विरह में
व्याकुल हो जाता। उमंग होती अब
प्रेमी भी मिलन आएगा, बरसात जो
हो रही—सावन आया।
मेरे भोले का महीना प्यारा।
सावन में गंगाजल अर्पण होता,
पंचामृत से स्नान करता।
भाँग, धतूरा, बिल्वपत्र से भक्तों की
मनोकामना पूरी करता।
बम-बम भोले का महीना आया,
सावन का महीना आया।
देश की आज़ादी का पर्व भी इसमें।
शहीदों की गौरवगाथा का गौरवगान होगा।
घर-घर तिरंगा बड़ी शान से लहराएगा।
आज़ादी का जश्न बड़ा होगा।
सावन का महीना जो आया,
राष्ट्रभक्ति का जज़्बा लाया—
सावन जो आया।
खुशियों का त्योहार है यह सावन।
कलाई में सजता विश्वास का धागा।
रक्षा का वचन देता भाई।
अटूट प्रेम और विश्वास का बंधन है
यह रक्षाबंधन।
हर खुशी से भर जाता मन,
सावन जो आता—सावन जो आता।
— मोहित जागेटिया

सावन आया

महीना बड़ा प्यारा आया, यह सावन।
भक्ति का यह महीना कितना है पावन।
शिव का हर कांवड़िया "बम-बम" बोल रहा,
भोला भक्तों के लिए द्वार खोल रहा।।

चारों ओर लगी शिव-दर्शन की कतार,
शिव मंदिर में गूँज रही जय-जयकार।
गंगाजल से शिव का अभिषेक हो रहा,
हर शिव-भक्त आज शिव-भक्ति में खो रहा।।

शिव को भाँग, धतूरा, बिल्वपत्र का अर्पण,
पंचामृत स्नान कर चढ़ाए चंदन।
मन में अटूट भक्ति का भाव लिए दर्शन,
सफल हो जाता हर शिव-भक्त का जीवन।।

शिव ही महाकाल, वही ओंकार हैं,
भोलेनाथ हम सबको सदा स्वीकार हैं।
डमरूधारी, कैलाशपति, त्रिपुरारी,
मुक्तिदाता, अविनाशी, काशी-विहारी।।

शिव की महिमा को हम सबने गाया,
पूजन का यह पावन महीना आया।
सदा रहे शिव-आराधना और साधना,
सावन में करें सच्चे मन से वंदना।।

जब भी रिमझिम वर्षा बरसती है,
मन शिव-दर्शन को ही तरसता है।
हर भक्त एक लोटा जल ले आया है,
पावन महीना बड़ा सावन आया है।।

— मोहित जागेटिया

सावन आया

महीना बड़ा प्यारा आया, ये सावन।
भक्ति का ये महीना कितना है पावन।
शिव का हर कांवड़िया बम-बम बोल रहा,
भोला भक्तों के लिए द्वार खोल रहा।।

चारों ओर लगी शिव-दर्शन की कतार,
शिव मंदिर में हर भक्त की जय-जयकार।
गंगाजल का शिव पर अभिषेक हो रहा,
आज शिव-भक्त शिव-भक्ति में खो रहा।।

शिव को भाँग, धतूरा, बिल्वपत्र का अर्पण,
पंचामृत स्नान कर, करता तिलक चंदन।
मन में भक्ति का भाव ले, करता दर्शन,
सफल हो जाता हर शिव-भक्त का जीवन।।

शिव ही महाकाल, वही ओंकार हैं,
केदारनाथ हम सबको स्वीकार हैं।
शिव डमरू वाले, वे कैलाश निवासी,
मुक्ति करते वे अविनाशी और काशी।।

शिव की हर महिमा को हम सबने गाया,
हम पूजा करें, शिव का महीना आया।
सदा हो शिव-आराधना और साधना,
सावन में करें सच्चे मन से वंदना।।

जब भी रिमझिम बारिश सदा बरसती है,
ये नयन शिव-दर्शन को भी तरसते हैं।
हर भक्त एक लोटा जल का लाया है,
पावन महीना बड़ा सावन आया है।।

— मोहित जागेटिया