शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

समय पर कविता

   समय

में समय हूँ कभी नही रुकता हूँ

में समय हूँ कभी नही झुकता हूँ।

में हर पल चलता रहता हूँ 

 हमेशा बदलता रहता हूँ।

जिसनें भी पहचाना है 

उसको मेने  जाना है।

किसी की में दास्तान लिखता हूँ 

किसी का में सम्मान लिखता हूँ।

मेरे प्रभाव से ही कोई आगें बड़ता है 

मेरे अभाव से ही कोई पीछे रहता है।

में कभी दिन तो कभी रात बन जाता हूँ 

में दो दिलो की कभी बात बन जाता हूँ।

में कभी सुबह तो शाम बन जाता हूँ 

कभी किसी का में नाम बन जाता हूँ ।

    Mohit