"दुनिया मे आते ही पहचान होती है नामकरण"
हर परिवार में उस समय खुशी दुगनी हो जाती है।जब उस घर मे नया मेहमान आता है यानी किसी बच्चे का जन्म होता है।उस समय बच्चे के माता पिता को दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिलती है ।उनकी सबसे बड़ी दौलत ये होती जो उनको मिलती है।घर परिवार में खुशी ही खशी होती है।जब किसी बच्चे का जन्म होता है।कोई पापा तो कोई माँ बनती है।कोई दादा दादी,कोई नाना नानी, तो कोई बुआ बनती है।ये सब रिश्ते हर बच्चे के जन्म के साथ ही बन जाते है।हर कोई उस बच्चे को पहली तस्वीर देखना चाहता है।उसको सहलाना चाहता है।
बच्चे का जन्म होते ही परिवार में उसके नामकरण की सोचने लगे जाते है।हिन्दू रीति रिवाज में बच्चे का जन्म होते ही ज्योतिशास्त्र के अनुसार बच्चे के जन्म समय के अनुसार उसका नामकरण संस्कार होता है।रीति रिवाज के साथ पंडित के द्वारा उसका नामकरण किया जाता है।बाद में उसको उस का नाम दिया जाता है।जो भविष्य में उस बच्चे को उस नाम से ही सम्बोधित किया जाता है।हर बच्चे की पहचान उसके नाम से होती है।
मोहित जागेटिया