शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

युद्ध और बुद्ध

*युद्ध और बुद्ध*

दुनिया की ये चाल बड़ी ये चाल है।
युद्ध की ओर जा रही ये दुनिया,
बुद्ध को भूल रही।

मानवता भी मर रही,
इंसानियत भी खो रही।

बारूद के मैदान पर पड़ी
जंग-ए-दुनिया!

मतलब की ये दुनिया,
अपने मतलब के लिए
खुद को नीचे न समझे कोई।

खुद की शक्ति के लिए
औरों के विनाश को चुन रही।

विकसित और विकास का
रास्ता बदलकर दुनिया
बारूद का रास्ता अपना रही!

मगर
युद्ध से समस्या का कोई समाधान नहीं।

बुद्ध के रास्ते अपना ले
फिर से ये दुनिया,
मानवता के लिए, प्रकृति के लिए।

शांति की सबसे बड़ी शक्ति है।

हर लड़ाई का अंत बात से हुआ,
तो फिर लड़ाई से पहले
बात-चीत अपना ले।

युद्ध का शोर विकास का विनाश
कर रहा, एक देश दूसरे की मानवता
का कल्याण मिटा रहा है।

शक्ति की सफलता जंग नहीं,
मानवता का कल्याण का भाव रखा
वो सबसे शक्तिशाली है।

— मोहित जागेटिया

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