गुरुवर वंदना
मंगल-पुष्प वर्षा करो, गुरुदेव जो आएँ।
गुरुदेव के आने से मन मेरा हर्षाए।।
सब बोले मोर-पपीहा, मधुर साज सुनाएँ।
गुरुवर की वंदना में नमन के गीत गाएँ।।
मेरे भाग्य में तुम-से गुरुवर मुझे मिले हैं,
जीवन के पथ पर खुशियों के फूल खिले हैं।
गुरु के आने से खुशियाँ ही खुशियाँ छाईं,
ज्ञान-गंगा बन मेरे आँगन स्वयं ही आई।।
हम शीश झुकाकर गुरुवर को करते प्रणाम,
गुरुवर के पावन चरणों में मिलते चारों धाम।
गुरुवर के आने से मन की ज्योति जल जाए,
मेरे गुरुवर के दर्शन से नयन भर आएँ।।
कुम-कुम रोली,अक्षत से हम भी सत्कार करें।
मेरे गुरुवर की हम सदा जय जयकार करें।।
— मोहित जागेटिया