भक्ति का यह महीना कितना है पावन।
शिव का हर कांवड़िया "बम-बम" बोल रहा,
भोला भक्तों के लिए द्वार खोल रहा।।
चारों ओर लगी शिव-दर्शन की कतार,
शिव मंदिर में गूँज रही जय-जयकार।
गंगाजल से शिव का अभिषेक हो रहा,
हर शिव-भक्त आज शिव-भक्ति में खो रहा।।
शिव को भाँग, धतूरा, बिल्वपत्र का अर्पण,
पंचामृत स्नान कर चढ़ाए चंदन।
मन में अटूट भक्ति का भाव लिए दर्शन,
सफल हो जाता हर शिव-भक्त का जीवन।।
शिव ही महाकाल, वही ओंकार हैं,
भोलेनाथ हम सबको सदा स्वीकार हैं।
डमरूधारी, कैलाशपति, त्रिपुरारी,
मुक्तिदाता, अविनाशी, काशी-विहारी।।
शिव की महिमा को हम सबने गाया,
पूजन का यह पावन महीना आया।
सदा रहे शिव-आराधना और साधना,
सावन में करें सच्चे मन से वंदना।।
जब भी रिमझिम वर्षा बरसती है,
मन शिव-दर्शन को ही तरसता है।
हर भक्त एक लोटा जल ले आया है,
पावन महीना बड़ा सावन आया है।।
— मोहित जागेटिया