तुम्हे सोच कर अब कल लिख रहा हूँ।।
तमन्ना रही जो उसको सोच रहा,
चल रहा जो वो हर पल लिख रहा हूँ।
मुसीबत के दौर में जो साथ रहें,
उन हाथ को मैं निर्मल लिख रहा हूँ।।
जिनको कभी दिल से समझ न पा रहें,
कठोर मन से फिर सरल लिख रहा हूँ।।
जब से अकेला बैठ कर सोच रहा,
जिंदगी का क्या हल लिख रहा हूँ।।
मोहित जागेटिया