रिमझिम-रिमझिम बरसात का
मौसम आया, सावन आया।
हरि-भरी धरा, खिलता उपवन,
बहती नदिया, कल-कल करते
झरने, महकता मन, सुहाना
मौसम आया—सावन आया।
प्रेम का पपीहा बोले, बोले मोर, कोयल।
पेयसी का दिल भी प्रेमी के विरह में
व्याकुल हो जाता। उमंग होती अब
प्रेमी भी मिलन आएगा, बरसात जो
हो रही—सावन आया।
मेरे भोले का महीना प्यारा।
सावन में गंगाजल अर्पण होता,
पंचामृत से स्नान करता।
भाँग, धतूरा, बिल्वपत्र से भक्तों की
मनोकामना पूरी करता।
बम-बम भोले का महीना आया,
सावन का महीना आया।
देश की आज़ादी का पर्व भी इसमें।
शहीदों की गौरवगाथा का गौरवगान होगा।
घर-घर तिरंगा बड़ी शान से लहराएगा।
आज़ादी का जश्न बड़ा होगा।
सावन का महीना जो आया,
राष्ट्रभक्ति का जज़्बा लाया—
सावन जो आया।
खुशियों का त्योहार है यह सावन।
कलाई में सजता विश्वास का धागा।
रक्षा का वचन देता भाई।
अटूट प्रेम और विश्वास का बंधन है
यह रक्षाबंधन।
हर खुशी से भर जाता मन,
सावन जो आता—सावन जो आता।
— मोहित जागेटिया