सत्ता पाने के लिए आज कुछ खास करना है
अपनी गलती का ही हमें उपहास करना है
कब तक बेचैन बेटे हम सत्ता के विरोधी ,
अब छोले भटूरे खा कर उपवास करना है ।
मोहित
शनिवार, 14 अप्रैल 2018
उपवास
रविवार, 8 अप्रैल 2018
जिंदगी
जिंदगी सुबह है जिंदगी शाम है ।
जिंदगी तो इस जीवन का नाम है।
अब डल रही ये सुबह और शाम है
बन रहा इस जीवन का ये काम है।।
आज यहाँ कल वहाँ ये चल रही है
अपने दम पर जिंदगी पल रही है।
आज कल बचपन की यादें छोड़ कर
ये आंधी के बीच अब जल रही है।।
जिंदगी तो बात बात में कट रही
रोज उम्र हमारी यू घट रही है।
जिंदा तब तक जिंदगी जी रहा हूँ
रोज इस के लिए जहर पी रहा हूँ।
जिंदगी ही जीवन की मुस्कान है
जिंदगी ही जीवन की पहचान है।
मोहित
शनिवार, 7 अप्रैल 2018
जन्म दिन पर
आपके चहरे की मुस्कान कभी नही जायें।
नजरों से पलकों पर कभी नही आंसू आयें।
हर ख्वाब की सारी इच्छा पूरी हो आपकी ,
जन्म दिन पर ये आशीष तुम हम सब से पाएं।
मोहित
हर पल आपके होंठों पर मुस्कान रहें ।
आपकी खुशी में आपका सम्मान रहें ।
जिसके साथ महक उठे जिंदगी आपकी
आपके आस पास वो ही इंसान रहें ।
मोहित
मोहब्बत के सफर को शमा का परवान दे देना
जा कर उसको मेरी यादों की मुस्कान दे देना।
उनकी कहि बातों से उनका तुम गुणगान दे देना ।
वो मोहब्बत की आग इस दिल मे आज भी जल रही,
मोहब्बत के सफर को शमा का परवान दे देना।
मोहित
तेरा होने में मुझे अब डर लगता है
तेरी यादों में मुझे मेरा घर लगता है।
तेरे साथ मुझे अब भी वो सफर लगता है।
हो तुम किसी ओर के ये में अब जानता हूँ,
तेरा होने में मुझे भी अब डर लगता है।
मोहित
बुधवार, 4 अप्रैल 2018
विदाई दूंगा
नम आंखों से तुमको विदाई दूंगा ।
तह दिल से तुमको मैं बधाई दूंगा।
रहना तुम हमेशा वहा पर सलामत,
ये ही उस ईश्वर से दुवाई दूंगा ।।
मोहित
मंगलवार, 3 अप्रैल 2018
आरक्षण
आरक्षण की आग में मेरा देश जल रहा है।
न जाने किस आग में मेरा देश जल रहा है
कौन से आदर्श पर आज कल ये पल रहा है।
भीमराव के संविधान को भी तोड़ा जा रहा
इस देश की दिशा को ही और मोड़ा जा रहा।
हर चारोयें पर अब रोज दंगा हो रहा है
आरक्षण के लिए ये देश गंदा हो रहा है।
ये कैसी तुमने आग लगाई बसें जलाई
क्या तुमने बाटने,तोड़ने की अलख जगाई।
भीमराव ने न्यायालय को भी सम्मान दिया
आज उसी न्यायालय को तुमने अपमान दिया।
प्रतिभाओं को दबाया तुमको आगे बड़ाया
इस देश ने तुमको हमेशा ही आगे लाया।
इस देश मे तुमको हर जगह पर जब स्थान दिया
आसन,सिंहासन पर बैठा कर सम्मान दिया ।
तो क्यू अपना राष्ट धर्म को तुम भूल रहें हो
अपना कर्तव्य और कर्म को तुम भूल रहें हो।
हम सबको सम्मान का बराबर अधिकार मिलें
एक दूजे से आपस में हमेशा प्यार मिलें।
जातिवाद और आरक्षण को अब खत्म करो
राष्ट धर्म का तुम अब अपना सच्चा कर्म करो।
मोहित