मंगलवार, 13 नवंबर 2018

बचपन

" बचपन"

एक बचपन का जमाना था
नही कोई भी ठिकाना था
कहाँ पर रहना कहाँ जाना
सब के सामने बहाना था।।
ये उम्र कब अब डल गई है
जिंदगी अब कब चल गई है
वो बचपन तो मस्ताना था
अब वो यादें निकल गई है।।
बचपन आज याद आता है
हर मौसम हमको भाता है
बचपन अब वो नही रहा है
आज खुशिया कहाँ लाता है।।
मोहित जागेटिया

नेता

जनता की थी अब की बार ये पुकार ।
आये   कोई   अब  नया  उम्मीदवार।
नई  आशाये  नया  विश्वास  होता,
तब जा कर होता किसका बेड़ा पार।।
मोहित

जनता  करेगी  किसका  बेड़ा पार।
जनता  ही  चुनेगी  ये  वो  सरकार।
जिसने नही सुनी थी जनता की तब,
उसकी  जनता  के  दरबार  मे  हार।
मोहित

चुनाव


हर वादे और नारे को
जनता याद रखेगी।
आये है! चुनाव तो
जनता जुवाब रखेगी।
किसने क्या क्या कहा
इस बात भी वो ख्याल रखेगी।
कौन कौन झूठे वादे करता
किसका नेक इरादा होता है।
पिछला वाला वादा किसने भूला
इस बार कौन सा वादा करेगा।
जनता !नेताओ का वादे और
नारों का चुनाव में जवाब रखेंगी
ये जनता नेताओं का पांच साल
का हिसाब रखेंगी।।
मोहित

रविवार, 11 नवंबर 2018

पर्यावरण

बहुत मुश्किल  से बीत रहा हमारा हर क्षण।
दूषित हो रही हवा धरती का हर कण कण।
अब  बड़ा  मुश्किल होगा सास ले पाना भी
आओ  सब  हम  मिल कर बचायें पर्यावरण।।
मोहित

रविवार, 4 नवंबर 2018

धनतेरह

दिनों दिन बढ़ता जाए सबका कारोबार।
माँ लक्ष्मी की सभी पर हो धन की बौछार।
सबसे घर खुशियों की ये दौलत बनी रहें,
ऐसा  हो  इस  बार  धनतेरस  के  त्योहार।।
मोहित

शनिवार, 3 नवंबर 2018

सपना


दिनाँक- - 4/11/2018
दिन-- - रविवार
विषय-- -सपना
विधा-- अतुकांत कविता
  एक सपना
एक सपना है सम्रद्ध भारत
खुशहाल भारत का।
एक सपना है श्रेष्ठ भारत
एक भारत का।
एक सपना कोई भूखा न सायें
कोई भी भूखा न रहें।
एक सपना सबको अपनी छत
वाला मकान मिलें।
किसान को अपनी फसल का
सही दाम मिलें।
सबको अपना अपना काम मिलें
कोई न रहें बेरोजगार।
एक सपना कोई रिश्वतखोरी
कोई भ्रष्टाचारी न हो।
एक सपना सैन्य शक्ति हमारी
मजबूत हो।
एक सपना सबको अच्छा
और सस्ता ईलाज मिलें।
एक सपना हमारी सभ्यता
संस्कारो को सम्मान मिलें
विश्वगुरु की फिर से पहचान मिलें।
एक सपना हमेशा गगन में
लहराता रहें तिरंगा हमारा।
एक सपना हिन्दू,मुस्लिन,सिख,ईसाई
भाईचारे की एकता की डोर में बंधे रहें
नाम -मोहित जागेटिया
पता -गांव सिदडियास जिला व तह.भीलवाड़ा(राज.)
मोबाइल नम्बर 9950100160

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

लेख4

दीपावली के पावन पर्व की आपको सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और मंगलकामना।
अमावस की काली रात में दीपों को सजा कर प्रकाश की विजय होगी।यानी बुराई पर अच्छाई की जीत होगी।अंधकार मिटेगा और प्रकाश होगा।दीपावली के त्योहार को रौशनी का त्योहार भी कहाँ जाता है।इस दिन भगवान राम रावण का वध कर के अयोध्या लौटे थे।अयोध्या वासियों ने भगवान राम के स्वागत में घी के दीये जलायें थे।हर और खुशिया ही खुशिया थी।
आज भी हर घर आंगन सज कर तैयार हो जाता है।हर घर बाजार रौशनी से नहाते है।माँ लक्ष्मी हर घर द्वार आये।इसलिए माँ लक्ष्मी की हर घर मे पूजा वंदना होती है।व्यापारी इस दिन से अपना नया व्यापार शुरू करते है।व्यापारियों का दीपावली से नया वर्ष होता है।सब लोग नए कपड़े पहनते।सब नई नई वस्तुएं होती है।लोग आपस मे मिलते है।एक दुझे को मिठाई खिलाते है।बस हर और खुशिया हो खुशिया होती है।ये त्योहार है प्रेम भाईचारे होता है।
लेकिन आज कल वो त्योहार नही रहें जो पहले हुआ करते थे।आज सबके पास समय का अभाव है।आज आपस मे वो प्रेम भाईचारा नही रहा जो पहले हुआ करता था।अब सब लोग एक दुझे को फोन पर ही शुभकामनाएं दे देते है।आपस मे मिलने का समय नही है।वो पटाखे नही रहें जो दीवाली पर होते थे।पटाखे होते भी है तो भी छोटी छोटी बातों पर लड़ाई हो जाती है।उस मिठाई में वो अब मिठास नही रही।मिठाइयों में मिलावट का जहर आने लगा है।
कुल मिला कर लोंगो के दिल मे अपनापन नही रहा है।आज कल सबके दिल मे द्वेष,क्रोध और कही प्रकार की बुराइया रहती है । इस दीपावली पर हम सब ये ही चाहते है मन के अंदर दिव्य ज्योति की जोत जला कर।बुराइयों के अंधकार को मिटा कर अच्छाई का प्रकाश फैलाएं।
मोहित जागेटिया