बुधवार, 16 जनवरी 2019

दोहें

ये जीवन खुशहाल हो,होठों पर मुस्कान।
पूरे सब अरमान हो,मंजिल पर हो ध्यान।।

मंजिल पर आगें चलें,रास्ते हो आसान।
जीवन मे मस्ती रहें,हौसलों की उड़ान।।

सबका अपना काम हो,मिलें काम का दाम।
ऐसा भी कुछ हम करें,जिससे हो बस नाम।।

जीवन देने से चला,ये ही तो संस्कार।
होयें हम सबका भला ,सबके हो सुविचार।।

मेरे सदा साथ रहें, मेरा तू वो यार
साथ सदा में ही रहूँ,बना रहे ये प्यार।।
मोहित जागेटिया

रविवार, 13 जनवरी 2019

मेरी कविता

विषय :मेरी कविता
विधा: मुक्तक
      
            मेरी कविता
मेरी कविता इंसान को इंसान बनाती है।
मेरी कविता अच्छा बुरा पहचान बताती है।
मेरी कविता देश के सब दुख दर्द को दिखाती
मेरी कविता देश का आज गुणगान गाती है।।

मेरी कविता शब्दों का रोज ये श्रृंगार होती।
मेरी कविता अपनों से अपनों का प्यार होती।
माँ, बहिन हर नारी का हमेशा सम्मान होती,
मेरी कविता हर दुश्मन को ये ललकार होती।।

मेरी कविता भारत गौरव का सम्मान होती।
मेरी कविता सबके होठों की मुस्कान होती।
ये देश का किसान और देश का जवान होती,
मेरी कविता पूरा ही ये हिन्दुस्तान होती। ।

नाम -मोहित जागेटिया
पता -गांव सिदडियास जिला -भीलवाड़ा
            राज. 311011
मोबाईल - 9950100169

शनिवार, 12 जनवरी 2019

स्वामी विवेकानंद

                " स्वामी विवेकानंद"
विश्व मे भारत देश का जिसने जब मान बड़ाया ।
वसुधैव कुटुम्बकम का विश्व में ज्ञान सिखाया।।1

हर युवा में जोस भरा उसको जब आगे बड़ाया।
उठो जागो चलो रुखों मत मंजिल पर चलाया।।2

सनातन धर्म का महान उपदेशक जग में आया।
उसका नाम तभी स्वामी विवेकानन्द कहलाया।।3

भारत का वो अनमोल आसमान का सितारा था।
युवा को नई दिशा देने वाला  वो दुलारा था।।4

अपने आदर्श एवं वाणी से सबको समझाया।
भारत की शान को विश्व मे जा कर जब लहराया।।5

हर चमन में महकता ऐसा भारत का चन्दन था।
विश्व का महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद था।।6

गुरुवार, 10 जनवरी 2019

हिंदी

मैं  हिंदी  माँ  बेटा  हूँ  हिंदी  का  सम्मान  लिखूंगा।
मैं अपने गीत गजल कविता से ये पहचान लिखूंगा।
आज मुझे हिंदी की बिंदी का जो भी प्यार मिला है,
हिंदी  के  पंख  पर  आसमान  में  उड़ान  लिखूंगा।।
मोहित जागेटिया

आंसू

    "  आंसू"
आखों से जब पानी
बहता है उसको हम
आंसू कहते है।
जब भी हमको को दर्द
होता है ये मन को हल्का
करने बहार आते है।
हर पीड़ा हो ये सहते है
हर खुशी में भी ये छलक
जाते है।
आंसू जन्म से हमारे साथ
होते हैं।बचपन मे भूख के आंसू
स्कूल,कॉलेज में सफलता एवं
असफलता के आंसू होते है।
जवानी में अपनी आशायें
निराशाएं के आंसू होते है।
बुढ़ापे में दर्द,पीड़ा के आंसू
हमारे साथ होते है।
गरीब के आंसू गरीबी के होते है
भूखा परिवार जब होता है जब
वो रोता है,किसान के आंसू
अपनी मेहनत पर फल नही मिलने
पर आते है।
अंत मे जाते है तो हमारे कर्मो
के निशान भी आंसू होते है
अगर लोगों के दिल मे जगह बनाई है
अंत समय ले जाते वक्त लोगों के
आँसू ही हमारी पहचान होते है।
मोहित

बुधवार, 9 जनवरी 2019

बीमार

बड़ी मुश्किल से गुजारे हर दिन हर वार।
मैं  था  जब  अस्पताल  में  भर्ती बीमार।
कभी दर्द भी भूल जाता खैरियत बतातें
मुझे मिला जब लोंगो का स्नेह और प्यार।।
मोहित जागेटिया

फुरसत

अतिथि रचना
विषय   फुरसत
                 मुक्तक
हमारी  और  तुम्हारी  ये ही चाहत है।
तुम्हें  हमारी  हमें  तुम्हारी  आदत  है।
हमारा प्यार का ये ही सफर चलता रहें,
आज तुम्हें भी फुरसत हमें भी फुरसत है।।

तुम्हारी दोस्ती ही हमारी एक चाहत है।
तुम से ही ये जिंदगी अब मेरी सलामत है।
तुम्हें भी फुरसत है हमारी दोस्ती के लिए,
इसलिए मुझे तुमसे ही तो ये मोहब्बत है।।

बचपन मे जिंदगी की सबको चाहत होती है।
खिलती जवानी में सबको मोहब्बत होती है।
इस उम्र के ढलते की कहानी कुछ और होती,
जब बुढ़ापे में हमारे पास फुरसत होती है।।
नाम -मोहित जागेटिया
पता -गांव सिदडियास
जिला -भीलवाड़ा
राज्य  -    राज. 311011
मोबाईल - 9950100169