शनिवार, 7 सितंबर 2019

हिंदी दिवस पर

हिंदी सबकी शान है ,हिंदी पर अभिमान।
हिंदी का बखान करें, हिंदी हो पहचान।।

                हिंदी भाषा

मैं  हिंदी  माँ  बेटा  हूँ  हिंदी  का  सम्मान  लिखूँगा।
मैं अपने गीत गजल कविता से ये पहचान लिखूँगा
आज मुझे हिंदी की बिंदी का जो भी प्यार मिला है,
हिंदी  के  पंख  पर  आसमान  में  उड़ान  लिखूँगा

हिंदी हम सबकी शान हो हिंदी भाषा से प्यार हो।
हिंदी से रिश्ता हम बनाने हिंदी से व्यवहार हो।।
हिंदी डोर है जो हम सबको अपनों में बांधती है,
सदा करें हम सम्मान इस भाषा का बस विस्तार हो।।

शब्द शब्द हिंदी के हर शब्द का हमको भी ज्ञान हो।
हिंदी भाषा से संस्कारों और संस्कृति का गान हो।
ह्रदय के भावों का शब्दों की आवाज का साज हो,
हिंदी पर हमको अभिमान हिंदी भाषा पहचान हो।।

हिंदी को मान सम्मान मिलें आज ये अभिलाषा हो।
राष्ट्र उन्नति में हिंदी भाषा हमारी अब आशा हो।
हिंदी की बिंदी का परचम सारे जग पर छा जाएं,
हम हिंदी को अपनाएं ये हमारी राष्ट भाषा हो।।
मोहित जागेटिया

चन्द्रयान की असफलता पर

चाँद से हार नही मानी कह दो चाँद से फिर आएंगे।
कामयाबी का फिर वही इरादा ले सफलता पाएंगे।
चाँद  से  सम्पर्क  टूटा  है  कोई  संकल्प  नही  टूटा,
एक दिन फिर से हम उसी चाँद पर तिरंगा लहरायेंगे।।
मोहित जागेटिया

सोमवार, 2 सितंबर 2019

गणेश चतुर्थी

*🌹🌹*गणेश चतुर्थी*🌹🌹*
     02/09/2019 सोमवार
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*विषय----- गजानन  (दोहा छन्द)*
आप सबको गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।।
भगवान गणेश सबका मंगल करें।

मंगल हो मंगल करें ,हम ले उनका नाम।
करें गजानन हम नमन,मंगल होगा काम।।

हे गणपति करना दया,ये विनती हर बार।
दूर कष्ट सब ही करो,खड़े तुम्हारे द्वार।।

प्रथम पूज्य तुम देवता, रहते तुम हर द्वार।
गली,शहर हर गूँजता,जय गणेश जयकार।।

लम्बोदर हे नाथ तुम, तुमको नित्य प्रणाम।
दूर विघ्न बाधा करें,होय सफल सब काम।

मोहित जागेटिया

🙏

रविवार, 1 सितंबर 2019

अतुकांत कविता

अप्रतिम छवि
प्रकृतिअनुकूल वातावरण
संध्या,,,,
पंछी लौट रहें थे
अपने अपने घर!
ची ची की आवाज का
मधुर गान का स्वर
पंछी से गुज रहा था।
मौसम सुहाना
बारिश का आना लग रहा था
कुछ पल
पहले बहुत उमस
बाद में ठंडी ठंडी हवा की
लहरें।
मैं अपने आंगन की छत से
प्रकति की शोभा को
निहार रहा था।।
आसमान के बादल काले हो रहे थे
हरियाली से धरती का श्रृंगार हो रहा था
पास ही सरोवर की लहरें
किनारों से मिलने को बेताब हो रही थी।
देखने मे ऐसे लग रहा था
गगन कोई प्रिय और
ये धरती प्रेयसी दिख रही थी।
ये धरती सोलह श्रृंगार कर बैठी थी
काले बादल बारिश बन कर
प्रेयसी से मिलने को बेताब लग रहा था।।
वो ही संध्या आरती का समय
आरती की घण्टी,शंख,,,उनका गान
कर रहें थे।।
मोहित जागेटिया

बुधवार, 28 अगस्त 2019

कविताएं लेखन

🏉🏉🏉🏉🏉🏉🏉🏉🏉🏉
~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
.    🌼  *कुण्डलिया छंद विधान* 🌼 
.              ( प्राथमिक  जानकारी)
.                      🌹🌹

सुन्दर दोहा  लीजिए, सुन्दर भाव बनाय।
तेरह ग्यारह मात्रिका, चरणों वार  लगाय।
चरणों वार लगाय, चरण अंतिम दोहे का।
रोला छन्द बनाय, चरण पहला  रोले का।
पहला  दोहा  शब्द, अंत रोले  के  अन्दर।
भरें भाव  भरपूर, बने कुण्डलिया सुन्दर।
.                         .....बाबू लाल शर्मा

*प्रथम दो पंक्ति दोहा* (१३,११ )
दोहे के प्रथम व तीसरे चरण में १३,१३ मात्राएँ अंत में २१२ या१११

दोहे के दूसरे व चौथे चरण में  ११,११ मात्राएं व अन्त में तुकान्त में एक गुरु एक लघु।

चार चरण रोला के
२४ मात्रा प्रत्येक में
११,१३
यति ११ पर

दोहे का अंतिम चरण  रोला प्रथम बनाय।
दोहे का ले शब्द प्रथम, रोला अंत सुनाय।।
- - - - - - - - -
अर्थात....

पहला दोहा,

फिर पहले दोहे के अंतिम चरण को लेते हुए रोला(अंत में गुरु,गुरु)

फिर रोला।।

प्रथम व अंतिम शब्द समान हो।
अर्थात जहाँ से शुरू वहीं से समापन हो, सर्प की कुण्डली की तरह फन एवं पूँछ एक साथ 🙏

*रोला*:-११,१३ मात्रा से लिखा गया छंद:-
११,मात्रिक प्रथम व तृतीय चरण (विषम चरण) का अंत गुरु लघु (२ १) से हो

१३ मात्रिक द्वितीय व चतुर्थ चरण (सम चरण) का अंत  २ २  या २ १ १ से हो।
.............................बाबूलालशर्मा
*उदाहरण*- - -
जगती  की शोभा सदा, जीवन  पानी  पेड़।
प्राणवायु  मिलती सखे, वृक्ष रोपि पथ मेड़।
वृक्ष रोपि पथ मेड़,जगह जो भी मिल जावे।
श्यामा  पर  ये पेड़, मेह  घन श्याम  बुलावे।
कहे 'लाल'  कविराय,धरा मनभावन लगती।
पर्यावरण  सुधार, बने स्वर्गिक जग जगती।
👆 इस तरह चौकल शब्द से ही शुरुआत करें।

विषम परिस्थितियों में इस तरह भी लिख सकते हैं👇
.            *करवा चौथ*
.           कुण्डलिया छंद
.           🌙🌙🌙🌙
चौथ  व्रती  बन  पूजती, चंदा  चौथ  चकोर।
आज सुहागिन सब करें,यह उपवास कठोर।
यह   उपवास  कठोर , पूजती   चंदा  प्यारा।
पिया  जिए  सौ साल, अमर संयोग  हमारा।
कहे लाल कविराय, वारती  जती  सती बन।
अमर रहे  तू चाँद, पूजती   चौथ  व्रती  बन।
.            🌙🌙🌙🌙
नारि सुहागिन कर रही,पूजा जप तप ध्यान।
पति की लम्बी आयु हो, खूब बढ़े जग मान।
खूब  बढ़े  जग मान, करे  उपवास  तुम्हारा।
मात  चौथ  सुन  अर्ज , रहे  संजोग  हमारा।
कर सोलह सिंगार, निभाये प्रीत  यहाँ  दिन।
पति हित सारे काज, करे ये  नारि सुहागिन।
.           🌙🌙🌙🌙
🙏✍©
रचियता:-
*बाबू लाल शर्मा "बौहरा"*
*सिकंदरा,दौसा,राजस्थान*
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कविताएं लेखन

हाइकु ,वर्ण पिरामिड  ,सायली ,ताका ,माहिया वर्णों का खेल है।
हाइकु 5,7,5 पर आधारित तीन पंक्तियों वाली गहरी रचना है ।
जिसमें दो बिंब जरुरी हैं।एक प्राकृतिक बिंब और दूसरा उससे संबंधित बिंब।
यह पहले 5 या 12में हो सकता है या अंतिम 12में ।
उदाहरण ':--
ओस की बूंद
बिखरे धरा पर ~
फूलों पे मोती
*पाखी*

माहिया
यह 12,10,12
वर्णों पर आधारित रचना है ।जिसमें नायक -नायिका के सवाल जबाव जैसे शब्द पिरोये जाते हैं।कुछफिल्मी गाने भी इस विधा पर हैंजो बहुत कर्णप्रिय हैं।
उदा.
*पाखी हूँ मैं पाखी*
*बच के रहना तुम*
*नयनन शर से साथी*
यहाँ पहले व तीसरे चरण का वाचिक तुकांत लय बद्धता के लिएजरूरी है।

वर्ण पिरामिड:-
यह एक वर्ण सेशुरू होकर सात वर्णों में पूर्ण होने वाली रचना है।
आधा वर्ण नहीं गिना जाता।
उदा.
हे
कृष्ण
उद्धव
मत आना
बताने यहाँ
ज्ञान विरह का
बाँटने मत आना।
पाखी

सायली
यह पांच पंक्तियों की रचना है ।
जिसमें वर्ण नहीं शब्द समूह भी गिने जाते हैं।
1,2,3,2,1 के क्रम से इसकी संरचना होती है।
कहते हैं सायली सीधा -उल्टा कैसे भी पढ़े सार्थक होनी चाहिये।
उदा.

सायली--
बनी
फूल पत्तो
सजी बगिया थी
उजाड दी
तुमने
पाखी

तांका कविताएँ
(5 7 5 7 7)

1
साहस शील
जीवन गतिशील
मन का सुख।
विवेक के सहारे
कर्तव्य निर्वहन।
2
बूढ़े माँ-बाप
जीने का हैं आधार
नही कबाड़।
हमारे हैं अस्तित्व
सुरक्षित भविष्य।
3
तेरा निज़ाम
सना है सन्नाटे से
मरता सच।
कराहता विश्वास
नही है कोई आस।
4
मुखौटा फेंक
असलियत दिखा
कुछ न छुपा।
पीठ पर न मार
सीने पर कर वार।
5
सच की मंडी
खूंटो पर लटका
बिकता सच।
सच के मुखौटों में
झूठ भरे चेहरे।

डॉ सुशील शर्मा

सोमवार, 26 अगस्त 2019

जन्माष्टमी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी मेरे व मेरे परिवार की और से हार्दिक शुभ कामनायें!
वो भगवान श्री कृष्ण हर कला में निर्पूर्ण थे।उन्होंने अपनी हर लीला को यहाँ दिखाया है।अपनी बाललीला से ले कर कंस जैसे दुराचारी का वध किया।जिन्होंने गीता का उपदेश दिया ।हर भक्त का उद्धार किया ऐसे परम् पिता परमेश्वर राजा धी राज द्वारकाधीश की चरणों में मेरा प्रणाम।

राधा उसकी प्रीत है,कान्हा उसका नाम।
रानी उसकी रुक्मणी,मीरा का वो श्याम।।
मोहित जागेटिया

मटकी फोड़ी उसने माखन चोर कहलाया।
ब्रज की गलियों में उसने जब शोर मचाया।
सब जब झूम उठे उसके आने की खुशी में,
गोकुल का ग्वाला बंशी वाला आज आया।।
मोहित जागेटिया

बड़ा ही नटखट है बाबा नन्द का लाला।
देवकी का छोरा और गायों का ग्वाला।
वो मोर मुकुट वाला हाथों में मुरली है,
साँवला सलोना यशोदा का श्याम काला।।
मोहित जागेटिया