शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

मेरी रेखा


मेरी जीवन रेखा तुम मेरा आकार हो ।
तुम धड़कन मेरी मोहब्बत का सार हो।
कल कल करती जीवन की आवाज हो तुम,
मेरे जीवन का तुम ही तो आधार हो।।

तुम से ही तो महकता मेरा उपवन है।
खिल जाता है जो तुम से मेरा ये मन है।
 मेरे इस जीवन की हर हम राह तुम से,
तेरी हर सासों से महकती धड़कन है।

प्रेम के भाव से भरा तुम्हारा प्यार है।
हर ऋतु की तुम से जीवन में बहार है।
मेरी महकती वादियां ये खिलता चमन,
मेरे जीवन की तुम से पतवार है।।

तेरी खुशबू को सासों में बसाया है।
जन्म जन्म का रिश्ता तुम से बनाया है।
तुम से प्रीत,प्रणय परिणय बंधन बांध कर,
हमने सात जन्मों रिश्ता अपनाया है।।
मोहित जागेटिया

इज़हार करता हूँ


तुम से है रिश्ता जन्म जन्मों का ये इकरार करता हूँ।।
तेरी हर धड़कन तेरी हर सांस से मैं प्यार करता हूँ।
इस जिन्दगी की हसरत से भरी हमारी भी कहानी हो,
खुशियों की बरसात में संग प्यार का इज़हार करता हूँ।।
मोहित जागेटिया

चली आओ तुम

"चली आओ तुम"

चली आओ तुम
मेरे दिल को सुक़ून देने
दिल बुलाता है 
तुम्हें बार बार।
मेरे गीतों को स्वर देने
मेरे शब्दों को आवाज देने
मेरी कलम की आवाज है
चली आओ तुम
मेरे मन को  सुक़ून देने।
मेरा प्यार तुम्हे बुलाता है
मेरी धड़कन मेरी हर सांस
अब तुम्हें बुलाती है
मेरी प्रीत में अपनी प्रीत
मिलाने,मेरे उदास मन को
खिलाने,ये दिल तुम्हें बुलाता,
चली आओ तुम
मेरे तन को सुक़ून देने।।
मोहित जागेटिया

तुम्हारे बगैर कुछ अच्छा नही लगता है।


"तुम्हारे बिगर कुछ अच्छा नही लगता है"

तुम्हारे बगैर कुछ भी 
मन नही लगता है
तन उदास-उदास
रहता कुछ भी अच्छा
नही लगता है।
दिल बेचैन है
मासूम सा चेहरा
निराश निराश रहता है।
तुम्हारी याद हर पल
बहुत आती है
तड़पता है दिल रोता है
बगैर तुम्हारे सब
अकेलापन लगता है।
तुम्हारी सोच में ख़ोया
ये मन रहता है।
ये दिल बार बार
तुम्हें याद करता है। ।
तुम्हारे बगैर कुछ भी
अच्छा नही लगता।।
मोहित जागेटिया

मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

दोहा


सुबह सबेरे नाम ले,करें प्रभु को प्रणाम।
वाणी सबकी मधुर हो,मुख पर हो प्रभु नाम।।
मोहित जागेटिया

सोमवार, 14 दिसंबर 2020

दिल ए जान लिखेंगे


संग तुम्हारे हम जिंदगी का अरमान लिखेंगे।
सफ़र कैसा भी होठों पर हम मुस्कान लिखेंगे।
अब न कभी कोई शिकायत होगी मोहब्बत से,
तुम्हारी चाहत को हम जो दिल ए जान लिखेंगे।।
मोहित जागेटिया

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

भुलानी होगी


भुलानी होगी वो यादें वो बातें।
गुजरे हर पल की बीती मुलाकातें।
याद को याद कर के क्या फायदा अब,
वरना बरसती आखों से बरसातें।।

वो गुजरे लम्हें की थी अलग कहानी।
याद करो तो आता नयनों से पानी।
अब मतलब क्या? उस लम्हें से हमको भी,
जो अधूरे इश्क़ में थी कभी जवानी।

देखे जो हमने सपने वो भी टूटे है।
संबंध भी अपने रिश्तों से जब छूटें है।
हम चले ऐसे सफर में जिसकी राह नहीं
चाहें वो  संबंध भी कभी हम से रूठे है

इश्क़ जिंदगी का एक मुकाम नहीं था।
इश्क़ जिंदगी का कोई नाम नहीं था।
जो सच्चा बंधन रिश्तों में प्यार भरे ,
वो इश्क़ धड़कनों का इल्जाम नहीं था।।
मोहित जागेटिया