बुधवार, 6 अप्रैल 2022

अधूरी कहानी


मेरी मोहब्बत की वो अधूरी कहानी है।
उसके बिना अब भी जिंदगानी मस्तानी है। 
जिसको हम क्या?उसके अपने भी न समझ पाएं,
उस लम्हें का मेरी आँखों मे ये पानी है।।

शनिवार, 2 अप्रैल 2022

शहीद दिवस

#इंकलाब #जिंदाबाद है,
हमको #भगत सिंह,#राजगुरु,#सुखदेव भी #याद है..
इंकलाब के लिए,इस वतन की मिट्टी के लिए अपने प्राण की प्रवाह की बैगर हँसते हँसते #फाँसी के #फंदे को #चूम लिया।।उन #शहीदों को #शत #शत #नमन,,,,,,,,

"जिनकी इस मिट्टी के लिए समर्पित जवानी हो गई।
उनके लहू की आज खुशबू भी आसमानी हो गई।
भगत सिंह,राजगुरु,सुखदेव राष्ट्र के लिए तन मन से,
चूम लिया उस फंदे को जिसकी अमर कहानी हो गई।"

:-@मोहित जागेटिया

हिन्दू नववर्ष

नयें प्रकृति के परिवेश से प्रफुल्लित नई आभा की मुस्कान से प्रव्जल्लित मन की उमंग,उत्साह से उत्साहित हिन्दू नव वर्ष विक्रम सवंत 2079 चैत्र एकम की और शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।।

प्रकृति के सारे फूल भी खिल जाएंगे ।
सत्य सनातन धर्म को हम निभाएंगे ।
हमारी संस्कृति और संस्कार से आज ,
चैत्र एकम को नव वर्ष हम मनाएंगे ।।

-- मोहित जागेटिया
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सोमवार, 21 मार्च 2022

मुक्तक


*मुक्तक...*
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शाम ढ़ले तो में रात का एक तारा बन *जाऊँगा* ।

चांदनी रात में सितारों का दुलारा बन *जाऊँगा* ।

वो रात हमारी खुशनुमा होगी सितारों के बीच ,

वो रात ढले तो में सूरज का प्यारा बन *जाऊँगा* ।।

         *-- मोहित जागेटिया*

मंगलवार, 8 मार्च 2022

खाटू श्याम


खाटू का मेला
दीवानों की बस्ती में हम भी दीवाने हो गयें।
आएं फागुन में तो, हम भी जाने माने हो गयें।।
मेले की मस्ती में बाबा के दर्शन से धन्य हो,
इस खाटू की नगरी में हम भी मस्ताने हो गयें।
मोहित जागेटिया

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

लता जी


शत शत #नमन #लतादी
आवाज की अमृत वाणी,संगीत की ताज।
जिसका अमृत रस हर ह्रदय पर हमेशा राज करेगा।व #भारतरत्न स्वर कोकिला #लता दी कि को #भावभीनी #श्रद्धांजलि

संगीत को भूल न पाए, वो साज बना गई।
सुरों की ऐसी लय दिल की आवाज बना गई।
वो आवाज की मधुर वाणी महकती रहेगी,
लता दी सुरों का ऐसा ताज,आज बना गई।।
मोहित जागेटिया

तुम्हें बुला रहा हूँ

मेरे दिल की आवाज से मैं बुला रहा हूँ।
मैं शब्दों के सुमन चरणों में चढ़ा रहा हूँ।
मेरे शब्द दिल के भाव से वंदना गाएं,
मुधर मधुर मेरे शब्द तुमको सुना रहा हूँ।।


शारदे तुम हाथों में वीणा बजा रही हो।
वेद से ज्ञान का पाठ माँ तुम पढ़ा रही हो।
स्वर से मिला रही,शब्दों के संगीत को,
वीणा से हर शब्द को स्वर से सजा रही हो।


ज्ञान के प्रकाश से अंधकार मिटा रही हो।
तुम शब्दों की भाषा से प्रेम लुटा रही हो।
कदम दर कदम हम सब सदा साथ चलते रहें,
सदा विश्वास का माँ तुम हाथ बड़ा रही हो।


तेरी वंदना में शब्द दीप जला रहा हूँ।
शब्दों की फूल माला तुमको चढ़ा रहा हूँ।
तुम्हारा आशीष मेरी कलम पर बना रहें,
माँ तुम्हें नमन कर आज कलम चला रहा हूँ।।
मोहित जागेटिया