ये चाँद तुम्हारा दीवाना है।
ये दिल भी तो अब अफ़साना है।
ये जब मोहब्बत करता है तो
हर मौसम भी बड़ा सुहाना है।
मोहित
बुधवार, 25 जनवरी 2017
हर मौसम सुहाना मुक्तक
सुप्रभात मुक्तक
चाँद गया सूरज आने वाला है।
भोर हुई पंछी जाने वाला है।
तुम भी उठो मेरे दोस्त सुबह है
वक्त तुम को भी जगाने वाला है
मोहित जागेटिया
मुक्तक जब अँधेरी रातों
जब अँधेरी घनी रातो में ।
प्यारी सी उनकी बातो में।
आनंद आता था कभी जो
उनसे कभी मुलाकातो में।
मोहित जागेटिया
पिता पर कविता
पिता
पिता मेरी आत्मा है
पिता ही परमात्मा है ।
पिता से हर सपना है
पिता से सब अपना है ।
पिता से ही रास्ता है
पिता ही मेरी आस्ताँ है ।
पिता चाँद है तारे है
पिता मेरे दुलारे है।
पिता पालन है पोषण है।
पिता बिना कभी शोसन है।
पिता ही मेरी वन्दना है
पिता मेरी आराधना है ।
पिता ही माझी ,पतवार है
पिता से ही तो परिवार है ।
पिता से ही संस्कार है
पिता से ही व्यवहार है ।
पिता से मुसीबत का हल है
पिता है तभी मेरा कल है ।
मोहित जागेटिया
सन्तो की चरणों में जाने से मुक्तक
सन्तों की शरण में जाने से भव पार होता है।
ऋषियो और मुनियो से अब तो उदार होता है ।
करलो तुम उनकी एक वन्दना और आराधना,
सन्तों की चरणों में जग का सभी सार होता है।
मोहित
कविता बड़ी इतराती थी वो
बड़ी इतराती थी वो
मुझ से शर्माती थी वो।
नेक इरादा था
मुझसे एक वादा था।
मेरी हसरत थी वो
एक दूजे की मोहब्बत थी वो।
प्यार वफ़ा निभाती थी वो
जब मिलने दूर से आती थी वो
न आने पर बड़ी ही घबराती थी वो
कुछ समझ न पाती थी वो।
बड़ी ही नादान परी थी वो
एक हवा के झोंके से उड़ जाती थी।
कन्या भूर्ण हत्या पर मुक्तक
मेरा क्या कसूर जो बचपन में तुम मुझे मार देते हो ।
में भी तो तुम्हारी हूँ क्यों नही मुझ पर प्यार देते हो ।
बचपन में लड़ती हूँ,जवानी में भी अब बहुत डरती हूँ,
बनती हूँ दुल्हन तो मुझ पर सभी खुशिया वार देते हो ।
मोहित