मंगलवार, 31 जनवरी 2017

बसन्त पंचमी पर सरस्वती वंदना

प्रातः वंदन करता हूँ तुमको
प्रातः सुमिरन करता हूँ तुमको।
ज्ञान का दीप जलाने वाली
अंधकार को मिटाने वाली।
तेरी चरणों में आज प्रणाम
तेरी चरणों को आज सलाम।

गीतों को स्वर बनाने वाली
शब्दों को स्वर सजाने वाली।
माँ गीत ग़ज़ल बनाने वाली
सबको सफल बनाने वाली
तेरी चरणों में आज प्रणाम
तेरी चरणों को आज सलाम।

शारदे कमल पर विराजमान
हम सबको देना तुम तो ज्ञान।
श्वेत वस्त्र और पुष्प धारिणी
माँ वीणा और हंस वाहिनी
तेरी चरणों को आज प्रणाम
तेरी चरणों को आज सलाम।
मोहित

सोमवार, 30 जनवरी 2017

धरती की पुकार कविता

धरती की पुकार
ये बदरा अब तो तुम
बरस जा हो
मेरी प्यास को
तुम आ कर
बुजा जा हो।
तुम से मिलने को
में तरस रही हूँ ।
एक बार बारिस
बन कर मिलने
तुम तो आजा वो ।
में तुम्हारे प्रेम की प्यासी हूँ
तभी तो तपन से तड़प रही हूँ।
बारिस बन कर
जब तुम आहोगें
हमारे प्रेम का जब इजहार
होयेंगा ।
में भी प्रपुलित हो कर
तुम से मिलने ऊपर
हरियाली बन कर
आहूगी।
तुम नदी,झरना बन कर
मिलने आना
मेरी प्यास बूजाना
में भी अपना
सृंगार करके
लता ,फूल बन के प्रेम का
इकरार करुँगी।
ये बदरा अब तो तुम
बरस जा हो
आठ माह से में
तुम्हारे प्रेम की
प्यासी बेटी हूँ।
अगर अब तुम न आहि
तो मेरे अंग(पेड़ पौधे)  नही
नष्ट होने लगेंगे।
में खुद भी सूर्य की जलन
में जल जाहूगी ।
अब तो बारिस बन कर
मुझसे मिलने आ जा हो ।
      मोहित

पतझड़ का मौसम

पतजड़ का मौसम आया है ।
तेरी यादो को लाया है ।
तुम से दूर नही अब रहता
आज नशा तेरा ही छाया।
हर कली में आज पाया है।
गीत  मेने आज गाया है ।
दूर जब तू चली जाती हो
यादो ने तुमको लाया है
     मोहित

रविवार, 29 जनवरी 2017

शिव

शिव शक्ति है ।
शिव भक्ति है ।
शिव साधना है
शिव आराधना है ।
शिव जटाधारी है।
शिव अवतारी है।
शिव नाम बड़ा है ।
शिव धाम बड़ा है।
शिव हर सूरत में है।
शिव हर मूर्त में है ।
शिव अविनासी है।
शिव कैलाश निवासी है।
शिव से ही संसार है।
शिव से ही भवपार है ।
शिव संकट हरने वाले है ।
शिव काम सभी के करने वाले है ।
शिव ही तो भोले है
सब शिव शिव बोले ।
      मोहित

शनिवार, 28 जनवरी 2017

हम से अगर धरती माँ मुक्तक

मिली जो चोट देश को अगर
             उसे भुलाया जायेगा।
फैलते हुए भष्टाचार को
             ना रुकाया  जायेगा ।
देश बर्बाद हो जायेगा
             हम देखते ही रहेगे।
हम से अगर न धरती माँ का
            कर्ज चुकाया जायेगा ।
          । मोहित  । 

गजल

मेरी गजल

गीत हम पुराने गाते थे।
दिल से ही उन्हें बुलाते थे।

हमेशा उन्ही यादो में थे
उन्हें कभी नही सताते थे।।

प्यार का यही तो नगमा हम
उसे दिल से ही सुनाते थे ।

दिल की गहराइ से भी हम
उसी आचल को लुभाते थे।

प्यार किसी और से किया था
मोहित को यार बनाते थे।।
         ।।   मोहित ।।

दिल कितना दीवाना है मुक्तक

मेरी चाहत की बातों को
              तुमने दिल से माना है,
इस आवारा दिल को तुमने
               भी जाना पहचाना है,
दुनिया को खोकर जब मैंने
                तेरे दिल को पाया है
तुमसे मिलकर जाना मैंने
           दिल कितना दीवाना है।
             
         ।। मोहित ।।