सोमवार, 27 जनवरी 2020

भारत माता


हे भारत माँ तेरी चरणों मे हम शीश चढ़ाने आये है।
आज वतन की इस मिट्टी का हम कर्ज चुकाने आये है।
हाथों में ले कर तिरंगा कदम से कदम मिला कर सारे
भारत माँ के लिए दे जान हम फर्ज निभाने आये है।
मोहित जागेटिया



रविवार, 26 जनवरी 2020

गणतंत्र दिवस पर

चूम लिया इस भूमि को,दे दी अपनी जान।
उनको मेरा है नमन,उनसे देश महान॥

उन वीरों को नमन है,वो भारत की शान।
देश धरा पर मिट गये,रखा देश का मान॥

ये भारत गणतंत्र है,मिला एक संविधान।
हम सबका अधिकार है,हो सबका सम्मान॥

ये भारत की शान है,भारत का ये मान।
रहे तिरंगा शान से,पूरा हिंदुस्तान॥



शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

बेटी दिवस पर

राष्ट्रीय बालिका दिवस को आइये आप और हम सब मिलकर सकंल्प लें कि बेटियों को जन्म एवं विकास के समान अवसर प्रदान करें...बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ...
मेरी एक कविता है बेटी पर 

ओस की बूँदें लगती है ये बेटियाँ

पायल की झंकार है इनसे

नारी का श्रृंगार है इनसे 

परिवार का मान है इनसे

परिवार का सम्मान है इनसे ।

ओस की बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

राखी और भाई दूज का त्योहार है

बेटियों से ही हमारा घर-परिवार है ।

ओस की बूँदें लगती हैं ये बेटियाँ ।

माँ बनके हर कष्ट सहन करती हैं ये

बेटी से बहू बनके घर से दूर रहती हैं ये

ओस की बूँदें लगती हैं ये बेटियाँ ।

बेटियाँ तो ऐसी होती हैं जो कुछ करके दिखाती हैं

कल्पना बनके चाँद छू आती है

रानी पद्मनी तो अपना जौहर दिखाती है

मीरा भी भक्ति में जहर पी जाती है

ओस की बूँदें लगती हे ये बेटियाँ ।

हर आँगन में ये फूल खिलाती 

हर रूठे हुए को ये मनाती ।

हर चमन में ये ही खिल जाती ।

ओस की बूँदें लगती हे ये बेटियाँ ।

काँच का दर्पण हैं ये  बेटियाँ

इनको तुम ना रौंदो ।

कही टूट के ये बिखर न जाये ।

ओस की बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

इन कच्ची कलियों को तुम ना तोड़ो

टूट के ये फूल ना बन पायेंगी

फूल ना बनेंगी तो खुशबू न ले पाओगे

बिन खुशबु जीवन बेकार रह जायेगा ।

ओस की  बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

ये तो वो परी हैं जो आज यहाँ हैं

तो कल उठकर कहीं और चली जायेंगी

ओस की  बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

      -- मोहित जागेटिया

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

कान्हा

मोहब्बत की बांसुरी को बजाते हो तुम कान्हा।
गोकुल की गलियों में गाय चराते हो तुम कान्हा।
जब प्रीत की डोर राधे ने तुमसे बांधी कान्हा,
जब मन मन्दिर में राधे को तुम पाते हो कान्हा।।
मोहित जागेटिया

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

इजहार है

आज तुम्हारी आँखों में ये प्यार है।
तुम पर सिर्फ मेरा ही तो अधिकार है।
तुम्हारी चाहत में ख़ो गया इस कदर,
ये तुम्हारे प्यार का ही इज़हार है।।
मोहित जागेटिया

ये मिट्टी है हिंदुस्तान की

"ये मिट्टी है हिंदुस्तान की"
      
इस मिट्टी को वंदन करूँ ये मिट्टी है बलिदान की।
खेतों में लहराती हरियाली ये मिट्टी  किसान की।
अब तो मंगल की यात्रा करते भारत माँ के बेटे,
चाँद पर तिरंगा लहराते ये मिट्टी है विज्ञान की।।

जाति,धर्म भेद है फिर भी ये मिट्टी है मुस्कान की।
पूजा,वंदना होती इस मिट्टी की ये भगवान की।
हर सुख दुख में लोग एक दूजे के काम आते आज,
भेद मिटा कर अपना बनाते ये मिट्टी इंसान की।

ये धरा है सन्त,मुनियों ऋषियों के तप के ज्ञान की।
ऐसी धरा है सभ्यता और संस्कारों के गान की।
इस मिट्टी पर ही बहती पावन नदिया खड़ा हिमालय,
ये हमारी पावन मिट्टी है सारी हिंदुस्तान की।
मोहित जागेटिया

बुधवार, 1 जनवरी 2020

अभिनंदन शादी में

*_अभिनंदन..._*
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सात फेरों का हमारा बंधन होगा ।
जन्म जन्मों का हमारा सबंध होगा ।।

चाँद-सितारों के सामने मिलन होगा ।
आने वाले हर जन का अभिनंदन होगा ।।

उस रब ने बनाई ये जोड़ी हमारी ।
आज दुनिया बनेगी साक्षी ये सारी ।।

शादी मंडप में सजेंगे चाँद-सितारे ।
आशीष देंगे बड़े जो सभी हमारे ।।

सबके आशीष से महक जायेगा गुलशन ।
खुशबू से खिल जायेगा ये सारा जीवन ।।

बड़ा ख़ूबसूरत होगा अपना मिलन ।
इस मिलन के साक्षी बनेंगे धरा और गगन ।।

स्नहे और प्यार से भेज रहा हूँ निमंत्रण ।
मेरी शादी में  आपका तहे-दिल से अभिनंदन ।।

* *मोहित जागेटिया*