मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

मेरे ये हालात है

आखों में आँसू है
दिल मे दर्द है
जाने क्या बात है ?

ग़म की तन्हाई में
गुजरी मेरी हर 
एक ये रात है ।

खामोश था
कुछ नहीं कहता था
कैसी ये मुलाकात है ?

भीगी आँखों से
ग़म छलकता है
कैसी ये बरसात है ?

मुसीबतों से भरे
जिंदगी के शायद
मेरे ये हालात है।।

मोहित जागेटिया

गीतों में डाला है

अपने ही गीतों को मैने शब्दों में ढाला।
जब से अंतमन की वेदना को मैने पाला।
दर्द भरी है जीवन की हर और एक गाथा,
हर गम को मैने शब्दों से गीतों में डाला।।
मोहित जागेटिया

सोमवार, 27 जनवरी 2020

भारत माता


हे भारत माँ तेरी चरणों मे हम शीश चढ़ाने आये है।
आज वतन की इस मिट्टी का हम कर्ज चुकाने आये है।
हाथों में ले कर तिरंगा कदम से कदम मिला कर सारे
भारत माँ के लिए दे जान हम फर्ज निभाने आये है।
मोहित जागेटिया



रविवार, 26 जनवरी 2020

गणतंत्र दिवस पर

चूम लिया इस भूमि को,दे दी अपनी जान।
उनको मेरा है नमन,उनसे देश महान॥

उन वीरों को नमन है,वो भारत की शान।
देश धरा पर मिट गये,रखा देश का मान॥

ये भारत गणतंत्र है,मिला एक संविधान।
हम सबका अधिकार है,हो सबका सम्मान॥

ये भारत की शान है,भारत का ये मान।
रहे तिरंगा शान से,पूरा हिंदुस्तान॥



शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

बेटी दिवस पर

राष्ट्रीय बालिका दिवस को आइये आप और हम सब मिलकर सकंल्प लें कि बेटियों को जन्म एवं विकास के समान अवसर प्रदान करें...बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ...
मेरी एक कविता है बेटी पर 

ओस की बूँदें लगती है ये बेटियाँ

पायल की झंकार है इनसे

नारी का श्रृंगार है इनसे 

परिवार का मान है इनसे

परिवार का सम्मान है इनसे ।

ओस की बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

राखी और भाई दूज का त्योहार है

बेटियों से ही हमारा घर-परिवार है ।

ओस की बूँदें लगती हैं ये बेटियाँ ।

माँ बनके हर कष्ट सहन करती हैं ये

बेटी से बहू बनके घर से दूर रहती हैं ये

ओस की बूँदें लगती हैं ये बेटियाँ ।

बेटियाँ तो ऐसी होती हैं जो कुछ करके दिखाती हैं

कल्पना बनके चाँद छू आती है

रानी पद्मनी तो अपना जौहर दिखाती है

मीरा भी भक्ति में जहर पी जाती है

ओस की बूँदें लगती हे ये बेटियाँ ।

हर आँगन में ये फूल खिलाती 

हर रूठे हुए को ये मनाती ।

हर चमन में ये ही खिल जाती ।

ओस की बूँदें लगती हे ये बेटियाँ ।

काँच का दर्पण हैं ये  बेटियाँ

इनको तुम ना रौंदो ।

कही टूट के ये बिखर न जाये ।

ओस की बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

इन कच्ची कलियों को तुम ना तोड़ो

टूट के ये फूल ना बन पायेंगी

फूल ना बनेंगी तो खुशबू न ले पाओगे

बिन खुशबु जीवन बेकार रह जायेगा ।

ओस की  बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

ये तो वो परी हैं जो आज यहाँ हैं

तो कल उठकर कहीं और चली जायेंगी

ओस की  बूँदें लगती है ये बेटियाँ ।

      -- मोहित जागेटिया

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

कान्हा

मोहब्बत की बांसुरी को बजाते हो तुम कान्हा।
गोकुल की गलियों में गाय चराते हो तुम कान्हा।
जब प्रीत की डोर राधे ने तुमसे बांधी कान्हा,
जब मन मन्दिर में राधे को तुम पाते हो कान्हा।।
मोहित जागेटिया

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

इजहार है

आज तुम्हारी आँखों में ये प्यार है।
तुम पर सिर्फ मेरा ही तो अधिकार है।
तुम्हारी चाहत में ख़ो गया इस कदर,
ये तुम्हारे प्यार का ही इज़हार है।।
मोहित जागेटिया