आओ हम सब गीत ख़ुशी के गातें है ।
गणतंत्र दिवस को शान से मनातें है ।
इस वतन पर मिटनें वालों की याद में,
इस तिरंगें को शान से लहराते है ।
मोहित
आओ हम सब गीत ख़ुशी के गातें है ।
गणतंत्र दिवस को शान से मनातें है ।
इस वतन पर मिटनें वालों की याद में,
इस तिरंगें को शान से लहराते है ।
मोहित
तुम से दूर भी रहूंगा फिर भी तुम्हारी याद आएगी ।
गुज़रे हुए पल की याद अब कभी नही भुलाई जायेगी ।
जिंदगी के सफर की अब तेरी और मेरी राह अलग है,
तुम्हें तुम्हारी राह पर तेरी वो मंजिल मिल पाएगी।।
मोहित
नया मौसम है नई ही बहार होगी ।
शब्दों पर माँ सरस्वती सवार होगी ।
करता हूँ मैं माँ सरस्वती को वंदन,
बसंत की खुशिया सब की अपार होगी ।
मोहित
तेरी वंदना के आज गीत गाहूँ
मेरे शब्दों से तुमको में रिजाहूँ।।
मेरे शब्दों को तुमनें सवारा है
मेरे गीतों को तुमने निहारा है
ये ज्ञान का दीप तुमने जलाया है
मेरे शब्दों को तुमने बनाया है।।
तेरी वंदना के आज गीत गाहूँ
मेरे शब्दों से तुमको में रिजाहूँ।।
करू वंदना तेरी वो ज्ञान देना
भारत वंदना का शब्द दान देना
हर शब्द शब्द मेरा अब बिखर जायें
तेरी वंदना से शब्द निखर जायें।।
तेरी वंदना के आज गीत गाहूँ
मेरे शब्दों से तुमको में रिजाहूँ।।
गीत, संगीत को तुमने सजाया है
हर कला को इंसान में बसाया है
हे स्वेत वस्त्र धारणी मेरा वंदन
वीणा वादनी तुमको हर बार नमन।।
में गोली आज चलाहूँगा दुश्मन को मार गिराहूँगा
सेना में जा कर अपने दुश्मन का बदला ले आहूँगा
जो पापा का काम रह गया उससे आज में निभाहूँगा
भारत माँ की सेवा में मैं भी अपना कर्ज चुकाहूँगा।।
मिटा डाला उसने मेरे हर सपने वह अरमान को
मिटा डाली मेरे परिवार की हंसी और मुस्कान को
में भी आज मिटा आहूँगा दुश्मन को उसके घर में ही,
मिटनें नही दूंगा मैं भी अपनी ही आन,बान ,शान को।।
दुश्मन के घर में जा कर में दुश्मन को मार गिराहूँगा
में अपनी मोत का बदला मोत से ही ले कर आहूँगा
उस हर जिहादी के घर आंगन को कब्रिस्तान बनाहूँगा
जो आँख उठाएगा मेरे मुल्क पर उसको मिठाहूँगा।
उसकी हर गोली का जुवाब में अपनी गोली से दूंगा
में अपने पिता का बदला आज सेना में जा कर लूंगा
उस के घर में जा कर आज उसकी में अर्थी सजाहूँगा
में गोली आज चलाहूँगा दुश्मन को मार गिराहूँगा।।
मोहित
कभी तो पागल लिखूंगा
बरसती आँखों को में खुद को बादल लिखूंगा ।
तेरी मोहब्बत में कभी तो पागल लिखूंगा ।।
जिंदगी की राह में प्यार के सफर में खुद को
कभी गीत,कभी शायरी खुद को गजल लिखूंगा।।
कभी तेरी आँखों को तारा ,दिल को दुलारा
खिलती तेरी हर अदा को आज कमल लिखूंगा।।
में हर दिन सुबह का सवेरा रात का अँधेरा
तेरे ख्यालो में खुद को आज घायल लिखूंगा।।
तेरी खिलती मुस्कान पर हर दिन में फ़िदा हूँ
तुमको पाने के लिए आज और कल लिखूंगा।।
मोहित
गजल
कभी में गीत लिखूंगा कभी में गजल लिखूंगा ।
तेरी हर एक अदा को खिलता कमल लिखूंगा ।
तुम्हें पाने के लिए में हर वक्त रोता हूँ,
जब बरसती है आँखे तुम्हें बादल लिखूंगा ।
इस दिल में समा जाहो आज इस में बस जाहों
तुम्हें पाने के लिए आज और कल लिखूंगा।
तेरे ख्यालों में जब कही और खो जाता हूँ
खुद को मोहब्बत के सफर में पागल लिखूंगा ।
हर चहरे में मुझे तुम नजर आती हो तुम्हे तो
किसी का घुंघरू तो किसी की पायल लिखूंगा ।
मोहित