कुदरत ने जो रचा है,
वो कुदरत के लिए ज़रूरी है।
पेड़-पौधे, जीव-जंतु,
नदियाँ, पर्वत, वादियाँ—
सब इसका सुंदर श्रृंगार हैं।
प्रकृति के इस श्रृंगार बिना
सब कुछ अधूरा, सूना है।
अरावली केवल पर्वतमाला नहीं,
ये राजस्थान का स्वाभिमान है,
वीरता का अमर अभिमान है।
इसे मिटने नहीं देंगे,
इसे टूटने नहीं देंगे।
अरावली ही मेवाड़ को
मरु-धरा से रोक रही है,
वरना रेत का सैलाब
हर ओर फैल जाता।
समतल हो जाती धरा,
हरियाली इतिहास बन जाती।
लाखों पेड़ कटेंगे तो
आशियाने उजड़ जाएँगे,
जीव-जंतु बेघर होंगे,
और साँसें महँगी हो जाएँगी।
जब अरावली का खनन होगा,
पर्वत पिघलेंगे,
सूरज की आग
सबको झुलसा देगी।
कभी अतिवृष्टि, कभी सूखा—
नदियाँ भी मौन हो जाएँगी।
देख लेना आने वाला कल,
परिणाम बहुत भयानक होगा।
अरावली को ठेस लगी तो
रण नहीं—
ज्वालाएँ होंगी।
:-मोहित जागेटिया
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