Monday, January 5, 2026

बेटी

2   मेरी बेटी
मेरे आँगन में भी महक छाई थी। 
उस दिन ख़ुशी से खुशियाँ ही पाई थी।
देख कर जीवन भी धन्य हो गया था,
जब से मेरे द्वार बेटी आई थी।

मेरे घर में खुशियों का त्यौहार है।
मेरी  बेटी  से  मेरा  संसार  है।
बेटी का जन्मोत्सव आया जो आज,
बेटी को स्नेह, प्यार और दुलार है।

मेरे सपनों की लम्बी उड़ान है। 
संग जीवन की सच्ची मुस्कान है।
उस ईश्वर ने दिया बड़ा उपहार,
हमेशा जीवन भी अब आसान है।

दादा-दादी की प्यारी है ये गुड़िया। 
चाचा की राज दुलारी है ये गुड़िया। 
नाना-नानी, मौसी का स्नेह मिला है,
पापा-मम्मी की सारी है ये गुड़िया।


बेटी जीवन जीने का एक जरिया है।
मन को छू जाएं हमारी वो परिया है।
इनके नन्हें कदमों में बड़ी आस भरी
मेरी बेटी नहीं ये मेरी दुनिया है।

मेरी हर हँसी में तेरा ही नाम आएगा।
सारी ख़ुशी होंगी अब गम का विराम आएगा। 
प्यारी बेटी तुम जो अब बड़ने लगी हो आगे,
सदा ही सदा खुशियों का अब पैगाम आएगा।।

मोहित जागेटिया

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