Wednesday, December 24, 2025

बेटी के जन्मदिन पर मेरे भाव


🎀✨ Happy 1st Birthday ✨🎀

💖 लव्यांशी जागेटिया 💖


🗓️ 9 जनवरी 2026


आज का यह शुभ दिन मेरे लिए बहुत खास है।

आज ही के दिन, एक वर्ष पूर्व,

मेरी दुनिया में—मेरे घर-आँगन में

मेरी नन्ही-सी बेटी का जन्म हुआ था।


मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानता हूँ

कि ईश्वर ने मुझे बेटी का पिता होने का

अमूल्य गर्व प्रदान किया।  लव्यांशी

तेरे आने की खुशी का अंदाज़ ही कुछ अलग था।


लव्यांशी, तुम मेरे जीवन में

ईश्वर का दिया हुआ सबसे अनमोल उपहार हो।

तुम्हारे आने से मेरे आँगन में रौनक आई,

मेरे घर में खुशियों का दीप जला—

जिसकी रोशनी सदा यूँ ही प्रकाशित रहेगी।


आज तुम्हारे जन्मदिन पर

मैं बस इतना कहना चाहता हूँ—


तुम जैसी हो, वैसी ही सबसे खास हो,

नन्हें कदमों में छिपी आज तुम बड़ी आस हो।

दुनिया की हर राह पर मुस्कुराती चली चलो,

बेटी, मेरे सपनों का तुम अटूट विश्वास हो।


ईश्वर तुम्हें लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य

और अनंत खुशियाँ प्रदान करे।

जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ, मेरी प्यारी बेटी लव्यांशी 🥰। ❤️ 🎉🎂

💝 मेरी प्यारी बेटी लव्यांशी 💝


— पापा ❤️

मोहित जागेटिया

Saturday, December 20, 2025

अरावली बचाओ

    'अरावली'
कुदरत ने जो रचा है,
वो कुदरत के लिए ज़रूरी है।
पेड़-पौधे, जीव-जंतु,
नदियाँ, पर्वत, वादियाँ—
सब इसका सुंदर श्रृंगार हैं।

प्रकृति के इस श्रृंगार बिना
सब कुछ अधूरा, सूना है।

अरावली केवल पर्वतमाला नहीं,
ये राजस्थान का स्वाभिमान है,
वीरता का अमर अभिमान है।
इसे मिटने नहीं देंगे,
इसे टूटने नहीं देंगे।

अरावली ही मेवाड़ को
मरु-धरा से रोक रही है,
वरना रेत का सैलाब
हर ओर फैल जाता।
समतल हो जाती धरा,
हरियाली इतिहास बन जाती।

लाखों पेड़ कटेंगे तो
आशियाने उजड़ जाएँगे,
जीव-जंतु बेघर होंगे,
और साँसें महँगी हो जाएँगी।

जब अरावली का खनन होगा,
पर्वत पिघलेंगे,
सूरज की आग
सबको झुलसा देगी।
कभी अतिवृष्टि, कभी सूखा—
नदियाँ भी मौन हो जाएँगी।

देख लेना आने वाला कल,
परिणाम बहुत भयानक होगा।
अरावली को ठेस लगी तो
रण नहीं—
ज्वालाएँ होंगी।

:-मोहित जागेटिया


Tuesday, November 11, 2025

वो दोस्ताना नहीं रहा है

आज नयें सफ़र में कुछ भी पुराना नहीं रहा है।
उसका मुसीबत में अब काम आना नहीं रहा है।।
वक्त बदला तो अब सारे ये हालात बदल गए।
अहसास का वो दौर सारी मुलाक़ात बदल गए।।
हमारी दोस्ती का वो अब जमाना नहीं रहा है।
मेरी दोस्ती का अब वो दोस्ताना नहीं रहा है।

न पहले वाला मिलता हमें अब सम्मान नहीं है।
ऐसे जिंदगी जी रहें। जैसे पहचान नहीं है।
जिंदगी के सफ़र में कल छूट गया,आज याद है,
हम गम का चेहरा छुपाते, अब मुस्कान नहीं है।
आज याद करें दोस्ती वो फ़साना नहीं रहा है
मेरी दोस्ती का अब वो दोस्ताना नहीं रहा है।

सच्ची दोस्ती का वो सफ़र अब भी याद आता है।
बीते साथ का वो वक्त नहीं भुलाया जाता है।
कभी फ़िक्र रहती एक-दूजे में कितना प्यार था।
रोज मोहब्बत करने वाला वो मेरा यार था।।
सच्ची दोस्ती का अब वो दीवाना नहीं रहा है।
मेरी दोस्ती का अब वो दोस्ताना नहीं रहा है।।

वो लौट कर फिर वापस आज मेरा पल आ जाएं।
दोस्ती से महकता सुकून भरा वो कल आ जाएं।
उसी अंदाज में मिलने का हर बहाना आ जाएं
गुजरे लम्हों का मेरा वो दोस्ताना आ जाएं।।

:-मोहित जागेटिया



दोस्ताना मिल जाएं

तुम्हारी दोस्ती का दोस्ताना मिल जाएं। 
संग जीने का वही बहाना मिल जाएं।
यार जिस सफ़र पर हम-तुम चल रहें थे वो,
फिर मेरी दोस्ती का खजाना मिल जाएं।

उसी यादों का फिर फ़साना मिल जाएं।
वो हँसी,बातें, वो जमाना मिल जाएं।
ये दुआ है बस इतनी मेरी ईश्वर से,
फिर से दिल से वो नजारा मिल जाएं।
मोहित जागेटिया 

Wednesday, October 29, 2025

दीपावली

*दीप उत्सव की आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्मी की कृपा सदा आप पर बनी रहे जीवन में खुशहाली सुख,शांति,समृद्धि,बनी रहे। जीवन के आनंद में सदा ही दीप ज्योति जलती रहें। जीवन को रोशन कर जाए।*
दीप ही दीप जलाएं राम जो घर आएं।
हर घर-गली, आँगन को अयोध्या बनाएं।
मन की रौशनी का ये पावन पर्व आया, 
सब मिल कर खुशियों की दीपावली मनाएं।
ओम प्रकाश सुथार
सिदडियास

तू जो राधे radhe गाता

तू जो राधे-राधे गाता है। 
उसकी तो वो राह दिखाता है।
मन मंदिर में उसकी पूजा हो,
हर मुसीबत में चला आता है।

मेरा श्याम है मेरा राम है
राधे राधे कहे ये काम है।

राधा नाम तो कष्ट हरता है।
सुख के सारे सागर भरता है।
दुख के दिन भी सारे मिट जाते,
राधे को सदा याद करता है।
मोहित जागेटिया 

सफ़र की धूप में


सफ़र की धूप में बरगद की छाँव मिल जाए ।
भाग दौड़ की जिंदगी में मेरा गाँव मिल जाए ।

निकला हूँ जिंदगी के सफ़र में इरादों से ,
अब मुझे तेरे शहर में हर भाव मिल जाए ।

मेरी मंजिल तो सदा से ही आसमान है ,
चलूँ हौसलों की रज पर वो पाँव मिल जाए ।

रोज उलझनों से भरी दुनिया में ये जिंदगी ,
नफ़रत की दुनिया में प्रेम का लगाव मिल जाए ।

मन का भेद मिटा कर अपनों से मिलाए जो ,
भव सागर पार कराए वो नाव मिल जाए ।

*-- मोहित जागेटिया*